गाँव की एक लड़की 

राजस्थान के एक गाँव में "राधिका " नाम की एक बहुत ही सुंदर लड़की रहती थीं। वह एक गरीब परिवार से थीं। उसके पिताजी घर का खर्च पूरी तरह से नहीं उठा पाते थें इसलिए राधिका जंगल से लकड़ियाँ काटकर उन लकड़ियों को बाजार में बेचती थीं। इस तरह से उनका घर का खर्चा चलता था। राधिका अब 21 साल की हो गयी थीं और उनके माँ-बाप को अब चिंता होने लगी थीं कि उसकी शादी बिना पैसो के हम कैसे करेंगें? मगर राधिका को अपनी शादी की कोई भी परवाह नहीं थीं क्योकिं वो अपने परिवार से बहुत प्यार करती थीं और राधिका इतनी खूबसूरत थीं कि उसके कई रिश्ते आते रहते थें मगर वो सबको मना कर देती थीं। 

पर किशन नाम का एक लड़का राधिका से बेहद प्यार करता था और राधिका के मना करने के बावजूद वो रोज बाज़ार में राधिका की लकड़ियाँ बिकवाने पहुँच जाता था। राधिका किशन से प्यार नहीं करतीं थीं क्योकिं शायद राधिका को किशन के प्यार पर भरोसा नहीं था। किशन भी एक गरीब परिवार का ही लड़का था। उसके पिताजी बाजार में सब्जी की रेड़ी लगातें थें लेकिन शायद किशन के पिताजी को मालूम था कि वो राधिका से बेहद प्यार करता हैं क्योंकि उनका लड़का किशन अपनें पिताजी को ये कहकर राधिका की लकड़ियाँ बिकवाने चला जाता था कि पिताजी राधिका का परिवार हमसें भी ज्यादा गरीब हैं इसलिए में उसकी लकड़ियाँ बिकवाने जाता हूँ। लेकिन किशन के पिताजी को उसकी ये बात अच्छी लगती थीं कि वो एक गरीब लड़की की सहायता करता हैं।  गाँव की एक लड़की: एक दर्द भरी कहानी | Gaon Ki Ek Ladki Hindi Story

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लेकिन राधिका को किशन के साथ लकड़ियाँ बिकवाना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था और एक दिन राधिका ने किशन के पिताजी से उसकी शिकायत ही कर दी और उसके पिताजी से ये कहा कि किशन उसके जबरदस्ती चेप होता हैं और इसे ये कह दीजिये की आज के बाद मेरी लकड़ियाँ बिकवाने मेरे साथ ना आए और मुझें इसकी सहायता की बिल्कुल भी ज़रूरत नहीं हैं। ये कहकर राधिका वहाँ से चली जाती हैं। राधिका की यह बात सुनकर किशन बहुत उदास हो जाता हैं और वह अपने कमरे में चला जाता हैं। अगले दिन जब राधिका बाजार में लकड़ियाँ बेचनें गयी तो किशन उसके पास लकड़ियाँ बिकवाने नहीं गया और उस दिन राधिका की लकड़ियाँ बहुत कम बिकी थीं और बहुत सारी लकड़ियाँ बच गयी थीं। 

अब राधिका को बहुत देर हो गयी थीं मगर उसकी लकड़ियाँ नहीं बिक रहीं थीं। तब उसनें सोचा कि आज तो बहुत कम लकड़ियाँ बिकी हैं और घर का खर्च कैसे चलेगा? ये सोचकर वो घर चली जाती हैं। राधिका जब घर पहुँचती हैं तो वो क्या देखतीं हैं कि उसके पिताजी की तबियत बहुत ज्यादा खराब थीं और उसकी माँ रो रहीं थीं और रोते-रोते कह रहीं थीं कि बेटी तुम्हारे पिताजी को जल्दी अस्पताल ले चलों में बहुत देर से तुम्हारा ही इंतजार कर रहीं थीं। जल्दी किसी तांगे वाले को बुलाकर लाओ ताकि तुम्हारें पिताजी को जल्दी अस्पताल लेकर चलें। लेकिन अब बहुत रात हो गयी थीं और रात में एक भी ताँगेवाला नहीं खड़ा था। राधिका अब बहुत परेशान हो गयी मगर उसे कोई भी रास्ता नहीं दिख रहा था। तभी उसे किशन की याद आई और वो दौड़ी-दौड़ी किशन के घर पहुँची फिर वो जोर-जोर से उसके घर का दरवाजा बजाने लगी।  गाँव की एक लड़की: एक दर्द भरी कहानी | Gaon Ki Ek Ladki Hindi Story

तब किशन घर का दरवाजा खोलता हैं तो किशन राधिका को अचानक इतनी रात को देखकर चौक जाता हैं और राधिका से पूछता हैं कि क्या हुआ इतनी रात को तुम यहाँ कैसे? घर पर सब ठीक तो हैं न? तभी राधिका कहती हैं कि किशन मेरे पिताजी की तबियत बहुत खराब है और उन्हें अस्पताल लेकर जाना हैं मगर बाजार में एक भी ताँगेवाला नहीं हैं अब तुम ही मेरी सहायता कर सकतें हो। तभी किशन चुप चाप अपनें पिताजी की सब्जी के रेहड़ी निकाल लेता हैं। और रेहड़ी के साथ अपने एक दोस्त को भी राधिका के पिताजी की सहायता के लिए बुला लेता हैं। और जल्दी से राधिका के पिताजी को किशन और उसका दोस्त रेहड़ी पर लेटा कर जल्दी से अस्पताल ले जातें हैं और अस्पताल ले जाकर जल्दी से उनका इलाज करवाते हैं। एक दो घंटे में राधिका के पिताजी का ईलाज हो गया और डॉक्टर ने कहा कि अब ये ठीक हैं बस कुछ दवाईयाँ मैंने लिख दी हैं बगल के कमरे में से ले लेना और ये दवाईयाँ अब इन्हें जीवन भर खानी होगी। 

तभी किशन कहता हैं कि राधिका तुम पिताजी से मिलों में दवाई लेकर आता हूँ। राधिका अपनें पिताजी से मिलनें उनके कमरे में जाती हैं तब उसके पिताजी बिल्कुल ठीक हो गए थें। तब वो राधिका से कहतें हैं कि बेटी तुम किशन से कितना चिड़ती हो फिर भी वो हमेशा तुम्हारी सहायता करता रहता हैं। तभी किशन का दोस्त भी बोलता हैं की राधिका किशन ही हम सब को ये कहता हैं कि तुम सब राधिका से ही लकड़ियाँ खरीदा करो ताकि तुम्हारी सहायता हो सकें और राधिका मैं तुम्हें ये भी बताना चाहता हूँ कि किशन बहुत ही अच्छा लड़का हैं और तुम हो कि किशन के घर पर जाकर उसकी बेज्जती कर दी। तब राधिका को विश्वास हो जाता हैं कि किशन बहुत ही अच्छा लड़का हैं।

 इतने में ही किशन दवाई लेकर आ जाता हैं और राधिका से कहता हैं, कि मैंने तुम्हारें पिताजी की सभी दवाईयाँ ले ली हैं और डॉक्टर ने भी छुट्टी दे दी हैं चलो अब घर चलतें हैं। अब सुबह के छः बज चुके थें हॉस्पिटल के बाहर ही ताँगे वाला खड़ा हुआ था किशन ने अपने दोस्त से कहा कि तुम रेहड़ी लेकर घर पहुँचा देना मैं ताँगे से राधिका के पिताजी को घर छोड़ आता हूँ। राधिका किशन से बहुत खुश थीं कि किशन मेरी कितनी सहायता कर रहा हैं। इतनें में वो सभी घर पहुँच जातें हैं और किशन ताँगेवाले को किराया देकर पिताजी को घर छोड़ देता हैं। तभी किशन जानें लगता हैं तो राधिका उसे बाहर रोकर उसका हाथ पकड़कर उससे माफ़ी माँगती हैं और ये कहती हैं कि किशन कल से तुम मेरी लकड़ियाँ बिकवानें आ जाना क्योंकि अब तुम्हारें बिना मेरा लकड़ियाँ बेचने का बिल्कुल भी मन नहीं करता और हाँ क्या शादी के बाद भी तुम मुझें बाजार में लकड़ियाँ बेचनें भेजोगे।  गाँव की एक लड़की: एक दर्द भरी कहानी | Gaon Ki Ek Ladki Hindi Story


राधिका की ये बात सुनकर किशन बहुत खुश हो जाता हैं और कहता हैं कि राधिका तुम्हें मुझसें प्यार हो गया ये कहीं मैं सपना तो नहीं देख रहा? मगर ये हुआ कैसे? तब राधिका कहती हैं किशन तुमनें मेरा दिल जीत लिया। एक दिन था जब मैं दुनियाँ के सभी लड़को से बहुत नफ़रत करती थीं मगर आज, मुझें पहली बार तुमसें बेहद प्यार हो गया। तब किशन कहता हैं राधिका आज मैं भी बहुत खुश हूँ कि आज मुझें मेरा प्यार मिल गया और मैं तुमसें वादा करता हूँ कि मैं तुम्हारें साथ-साथ तुम्हारें परिवार का भी ख्याल रखूँगा। "तो दोस्तों" राधिका को अपने परिवार से बहुत प्यार था इसलिए उसको ऐसा जीवन साथी मिला जो उसके साथ साथ उसके परिवार का भी ख्याल रखेगा। तो ये थी राधिका और किशन की प्रेम कहानी।

दोस्तों! गाँव की एक लड़की: एक दर्द भरी कहानी, हिंदी कहानी को पढ़ने के लिए धन्यवाद!  

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