दुल्हन ने शादी के बाद किया मना


शादी के बाद विदाई का समय था नेहा अपनी माँ से मिलने के बाद अपने पिता से लिपट कर रो रहीं थीं और वहाँ मौजूद सभी लोगो की भी आँखों में आँसू थे। उस समय नेहा नें घूँघट निकाला हुआ था और अब उसका विदा होकर ससुराल जानें का समय हो गया था। तो जैसे ही नेहा रोती हुई कार में बैठने लगी तभी उसकी छोटी बहन रोती हुई उससे दुबारा लिपटकर रोने लगी। तभी गाड़ी के पास खड़े नेहा के पति अविनाश से उसका दोस्त दिनेश कहता हैं अरें यार अविनाश यहाँ से घर पहुँचते ही सबसे पहलें होटल अमृतबाग पहुँच कर एक बढ़िया सा खाना खाएँगे क्योंकि यहाँ तेरे ससुराल में तो एक दम घटिया खाना था ऐसा खाना तो हमारे यहाँ कुत्तों को भी नहीं ख़िलातें। 

तभी साथ ही खड़े अविनाश के छोटे भाई ने भी कहा हाँ यार यहाँ का खाना तो एकदम बकवास था और रस मलाई में तो रस ही नहीं था। ये कहतें हुए वो तीनो ही जोर जोर से हँस रहें थे। तभी नेहा के पति अविनाश नें भी अपनें ससुराल वालों की मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि हाँ यार मैंने भी मजबूरी में ही यहाँ का खाना खा लिया वरना मैं तो ऐसे खाने को तो हाथ भी नहीं लगाता और अब पक्का हम तीनों घर पहुँचते ही होटल अमृतबाग का खाना खाएँगे। अपनें पति के मुँह से ऐसी ऐसी बातें सुनकर नेहा कार में बैठती बैठती रुक गयी और उसनें गुस्से में सबके सामने अपना घूँघट हटाते हुए कार के दरवाज़े को जोर से बंद किया और आँखों में आँसू लिए नेहा अपने पिताजी के पास चली गयी और उनका हाथ पकड़कर उनसे ये कहा कि पिताजी मैं ससुराल नहीं जाउँगी मुझें ये रिश्ता बिल्कुल मंजूर नहीं हैं।  दुल्हन ने शादी के बाद किया मना: एक दर्द भरी कहानी | Dulhan Ne Shadi K Baad Kiya Mana

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ये बात नेहा नें इतनी जोर से कहा कि सब लोग उसकी बात सुनकर हक्के बक्के रह गए। सब लोग नेहा के नजदीक आ गए और नेहा के ससुराल वालो पर तो जैसे पहाड़ ही टूट पड़ा हो। वजह क्या थीं ये किसी को भी समझ नहीं आ रहा था। तभी नेहा के ससुर राधेश्याम जी नें आगे बढ़कर नेहा ने पूछा कि नेहा बेटी बात क्या हैं तुम अचानक ही शादी होने के बाद अपनी विदाई होने के समय यूँ शादी को नामंजूर कर रही हो? तभी नेहा कुछ देर चुप रहनें के बाद अपनी आँखों में आँसू लिए अपनें ससुर से बोली कि बाबूजी आपको पता हैं मेरे माता पिता ने अपनें सभी सपनों को मारकर हम सभी बहनों को इतना पढ़ाया लिखाया और काबिल बनाया और आप जानतें हैं कि एक बाप के लिए उसकी बेटी क्या मायने रखती हैं। वैसे आप और आपका बेटा कभी नहीं जान सकतें क्योंकि बाबूजी आपके घर में तो कोई बेटी हैं ही नहीं।  दुल्हन ने शादी के बाद किया मना: एक दर्द भरी कहानी | Dulhan Ne Shadi K Baad Kiya Mana

और आप जानतें हैं मेरी शादी में आने वाले बारातियों के लिए खाने पीने की एक भी कमी न रह जाए इसलिए मेरे पिताजी पिछले तीन महीने से रात को 2 से 3 बजे तक जागकर मेरी माँ के साथ ये योजना बनातें थें कि रसोईया कौन होगा और खाने में बारातियों के लिए किस किस तरह का खाना बनवाना हैं और बारातियों को कहाँ बिठाना हैं। ताकि कहीं किसी को बुरा न लग जाये और शायद आप नहीं जानतें कि मेरी माँ नें पिछले एक साल से एक भी नई साड़ी नहीं खरीदी क्योंकि मेरी शादी में पैसो की कोई कमी न हो जाये और आज भी मेरी शादी में भी मेरी माँ मेरी बड़ी बहन की साड़ी पहन कर खड़ी हैं और ये तो कुछ भी नहीं मेरे पिताजी भी 150 रुपये की इस शर्ट के नीचे कई छेद वाली बनियान पहन कर खड़े हैं और ये सब सिर्फ इसलिए ताकि मेरी शादी में कोई कमी न रह जाये।
 
लेकिन इतनी मेहनत करने के बावजूद भी आज इस शादी में आपके बेटे को रोटियाँ ठंडी लगी उसके दोस्त को पनीर बकवास लगा और मेरे देवर जी को रसमलाई में तो रस ही नहीं मिला। और तो और मेरे पति अविनाश जी तो कह रहे थें कि वो तो ऐसे खाने को हाथ भी नहीं लागतें बस उन्होंने तो मजबूरी में ही ये खाना खा लिया। अगर सब कुछ इन्होंने मजबूरी में ही खाया हैं तो इसकी क्या गेरेन्टी हैं कि मुझसे शादी भी ये अपनी खुशी से ही कर रहें हैं। कल को अविनाश‍ जी ये भी कह सकतें हैं कि मुझसें भी इन्होंने मजबूरी में ही शादी की हैं और नेहा रोतें हुए अपनें ससुर से ये भी कह रहीं थीं कि जिस माता पिता नें मेरी शादी में दिन देखा न रात बस शादी की तैयारियों में लगे रहें उन माता पिता पर आज आपके बेटे और उनके दोस्त यूँ जोर जोर से हँस रहें हैं और उनकी इतनी बेज्जती कर रहें हैं। क्या आपके घर में माता पिता की इतनीं ही इज्जत होती हैं?  दुल्हन ने शादी के बाद किया मना: एक दर्द भरी कहानी | Dulhan Ne Shadi K Baad Kiya Mana

तभी नेहा के ससुर नें कहा कि बेटी इतनी छोटी सी बात पर तुम इतना नाराज हो गयी। तो नेहा नें अपने ससुर की बात को काटते हुए कहा कि बाबूजी ये छोटी सी बात नहीं हैं अगर शादी के बाद मैं भी आपकी इज्जत न करूँ तो आपको कैसा लगेगा? ये सुनतें ही नेहा के ससुर नें शर्म के मारे अपनी आँखे नीची कर ली। तभी नेहा ने कहा लेकिन बाबूजी आप चिंता न करिये हमारे अंदर हमारे अच्छे माता पिता के संस्कार हैं किसी की बेज्जतीं करना ये सब हमारे माता पिता नें हमें कभी सिखाया ही नहीं हैं। ये सुनते ही नेहा के पिताजी दयाशंकर जी ने आँखों में आँसू लिये अपनी बेटी को गले से लगा लिया और उससे कहा कि बेटी मुझे गर्व है कि तू मेरी बेटी हैं और अब तू शांत हो जा बेटी तुझें मेरी क़सम तू इन्हें माफ़ कर दे और ख़ुशी खुशी अपनें ससुराल चली जा। 

तभी नेहा का पति अविनाश भी नेहा के पिताजी और नेहा से हाथ जोड़कर माफ़ी माँगता हैं और ये कहता है कि बाबूजी मुझें माफ़ कर दो सारी गलतीं मेरी ही हैं लेकिन आज आपकी बेटी ने मुझें एक पिता की इज्जत करना सिखा दिया और आज के बाद मैं हर किसी के माता पिता हमेशा इज्जत करूँगा। उसी वक़्त नेहा के ससुर राधेश्याम जी भी आगे आकर अपनी बहु नेहा के सर पर हाथ रखकर कहतें हैं कि मैं तो बहूँ लेने आया था लेकिन ईश्वर बहुत कृपालु हैं उसनें मुझें बहु के रूप में एक बेटी दे दी और वो भी इतने अच्छे संस्कार वाली जो की माता पिता का भी इतना सम्मान करती हैं। और अब बेटी मेरे कहने से इन नालायको को भी माफ कर दे मैं हाथ जोड़ता हूँ तेरे सामनें। तभी नेहा अपनें ससुर जी के दोनों हाथों को पकड़ लेती हैं और कहतीं हैं कि नहीं बाबूजी आप मेरे पिता के समान हैं कृपया आप मेरे सामने हाथ मत जोडिए। 

तभी नेहा के पिताजी दयाशंकर जी भी कहते कि समधी जी आप मेरी बेटी के सामने हाथ जोड़कर कृपया हमें शर्मिंदा मत कीजिये। मेरी तो आपसे बस इतनी ही प्राथना हैं कि मेरी हमेशा आप मेरी बेटी को अपनी ही बेटी समझना और इससे कभी कोई गलतीं हो जाए तो इसे माफ़ कर देना। तो राधेश्याम जी नें अपनें समधी दयाशंकर जी का हौंसला बढ़ाते हुए कहा कि आप बिल्कुल चिंता मत करिये बल्कि अब तो नेहा बेटी ही हमारे पूरे घर को संभालेगी और अब ये ही हमारे घर की लक्ष्मी हैं। ये सुनकर नेहा के पिताजी बहुत ख़ुश हो जाते हैं और अपनी बेटी को ख़ुशी ख़ुशी विदा कर देते हैं और नेहा अब राजी खुशी अपनें ससुराल रवाना हो गयी थीं और अपने पीछे छोड़ गई थीं आँसुओ से भीगी हुई अपनी माँ और पिताजी की आँखे और अपने पिता का वह आँगन जिस आँगन में कल तक वह खूब हँसती खेलती थीं।  दुल्हन ने शादी के बाद किया मना: एक दर्द भरी कहानी | Dulhan Ne Shadi K Baad Kiya Mana


आज से इस आँगन की चिड़िया उड़ गई थीं किसी दूर प्रदेश में। तो दोस्तों बेटी माँ बाप का अभिमान व एक अनमोल धन होता हैं और दोस्तों अपनीं छाती पर पत्थर रखकर वो अपनी प्यारी बेटी और अपने जिगर के टुकड़े को उसकी शादी करके उसे विदा करता हैं इसलिए दोस्तों एक बाप अपनी बेटी की शादी करके वैसे ही उससे दूर हो जाता हैं और हमें उसका अपमान करके उन्हें और दुखी कभी भी नहीं करना चाहिए।

दोस्तों! दुल्हन ने शादी के बाद किया मना: एक दर्द भरी कहानी, हिंदी कहानी को पढ़ने के लिए धन्यवाद!  

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