मोनू ने सबकुछ देख लिया

पापा-पापा मुझे आपका मोबाइल दो न, मुझे गेम खेलना है। 8 साल की छोटी सी गुड़िया ने, अपने पापा सोहन से गेम खेलने के लिए मोबाइल की मांग की। सोहन ने कहा, नहीं बेटा अभी काम है मुझे बाद में दूंगा। गुड़िया ने जिद करते हुए कहा- नहीं पापा दो न मैं तुरंत गेम खेलकर दे दूँगी। सोहन ने फिर से कहा नहीं बेटा, मैंने कहा न मुझे अभी काम है मैं बाद में दूंगा। रोती हुई गुड़िया अपने माँ के पास गई और कहा देखो न माँ पापा मुझे मोबाइल नहीं दे रहे हैं।

वो कुछ काम भी नहीं कर रहे हैं और मुझे दे भी नहीं रहे हैं। गुड़िया की माँ नेहा चिल्लाते हुए बोली- अरे थोड़ी देर के लिए इसे मोबाइल क्यों नहीं दे देते। तब से सिर खा रही है। ये आजकल के बच्चे मोबाइल के कीड़े बन कर रह गए हैं। मोबाइल और कम्प्युटर के बारे में जितना हम माँ-बाप को पता नहीं होता उससे ज्यादा तो इन बच्चों को पता रहता है। वो हमारे पड़ोसी शर्मा जी हैं न उनका बेटा मोनु की उम्र हमारी बेटी से 1 या 2 साल ही ज्यादा होगी। उसे जब देखो मोबाइल में ही घुसा रहता है। कितना एडवांस हो गया है उनका बच्चा। मोबाइल तो अलग बात है वो लैपटाप भी चला लेता है। कितना मैच्योर बीहैव करता है वो। लगता है हम किसी बड़े लड़के से बात कर रहे हों। बात-विचार में अपने माता-पिता की तरह ही स्टाइल मेंटेन करता है वो छोटा सा बच्चा। मोनू ने सबकुछ देख लिया: सुविचार कहानी | हिंदी कहानी | Monu Ne Sabkuch Dekh Liya Hindi Story

उसके माँ-बाप भी तो कितने फ्रैंक रहते हैं सबके साथ साथ बैठकर टीवी देखना, मूवी देखना सब करते हैं। कितने सारे गेम लाकर रख दिया है उसके पिता ने उसके लिए। पूरे घर में गेम की सीडी बिखरी पड़ी रहती हैं। उपर से मोनु इतना स्मार्ट है कि वह खुद से ही इंटरनेट से गेम डाउनलोड कर लेता है। उनके बेटे को कभी रोते नहीं देखा। दूसरी तरफ हमारी बेटी को देखो बात-बात पर रोती रहती है। हर समय मोबाइल की रट लगाए रहती है। एक आप हो कि उसे तो मोबाइल देते ही नहीं। सोहन ने कुछ सोचते हुए कहा- वो सब तो ठीक है, उसके गेम खेलने के लिए एक अलग से मोबाइल दे दूंगा लेकिन इस तरह वो ज्यादा मोबाइल यूज करेगी तो उसके आँख पर बुरा असर हो सकता है। "
नेहा कुछ नहीं बोली तो सोहन ने कहा, "मैं अभी किसी काम से बाहर जा रहा हूँ, लगभग 10 मिनट में आ जाऊंगा फिर हमलोग सब मिलकर कहीं घूमने चलते है। नेहा ने कहा, ठीक है, तबतक मैं उसे तैयार भी कर दूँगी।


सोहन भी हाँ में रजामंदी देकर घर से बाहर चला गया। लेकिन 10 बजे का गया सोहन 11 बजने तक भी वापस नहीं आया। इस बीच नेहा ने उसे फोन लगाने की कोशिश भी की लेकिन उसका फोन हर समय व्यस्त ही बता रहा था।
नेहा को सोहन की चिंता होने लगी कि आखिर क्या बात है जो अभी तक सोहन आया नहीं। लगातार कोशिश के बाद आखिरकार एक बार सोहन का फोन लग ही गया। फोन लगते ही नेहा बोल उठी, क्या हुआ? 10 मिनट का बोल गए 1 घंटे से उपर हो गया तुम्हारा तो कुछ पता ही नहीं। सोहन ने बताया आज के घूमने का प्रोग्राम कैन्सल कर दो। आज हम घूमने नहीं जाएंगे और अगर जाएंगे भी तो शाम को।  मोनू ने सबकुछ देख लिया: सुविचार कहानी | हिंदी कहानी | Monu Ne Sabkuch Dekh Liya Hindi Story

नेहा ने आश्चर्य और चिंता भरे स्वर में पूछा- लेकिन बात क्या है? कहाँ हो तुम। सोहन ने कहा- हॉस्पिटल में हूँ। नेहा चीख पड़ी, क्या? हॉस्पिटल में क्या हुआ तुम्हें? सोहन ने कहा- मुझे कुछ भी नहीं हुआ मैं ठीक हूँ और मैं तुम्हें अभी कुछ भी नहीं बता सकता, घर आकर सारी बात बताऊंगा। लगभग शाम तक सोहन वापस आया। आते ही नेहा ने सवालों कि झड़ी लगा दी, तुमने तो कहा था शाम को घूमने चलेंगे। ये टाइम भी निकल गया। अब गुड़िया को कैसे समझाऊँ सुबह से सज-धज कर तैयार बैठी है कि कब पापा आएंगे और वह हम सबके साथ घूमने जाएगी। सोहन ने कहा उसे किसी तरह समझा-बुझा कर खिला-पिलाकर सुला दो मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है। नेहा ने ऐसा ही किया। रात को सोते समय नेहा ने सोहन से पूछा,अब बताओ क्या हुआ, आज दिनभर किस काम से बाहर रहे। 

सोहन ने बताया, वो हमारे पड़ोसी शर्मा जी हैं न उन्हें एक परेशानी आ गई थी, उसी में लगा रह गया। मैं आज सुबह जैसे ही घर से निकला तो बाहर देखा पार्किंग एरिया में कुछ लोग झुंड बनाकर खड़े थे, पास जाकर देखा तो मोनु वो 9 साल का छोटा सा बच्चा अपने साथ खेल रही बच्ची नित्या के साथ गलत हरकत करने की कोशिश कर रहा था। कुछ लोग उसकी अश्लील हरकतों को देख हंस-हँसकर बातें कर रहे थे, देखो आजकल के बच्चों को। कैसे हैं इनके माँ-बाप जिनके बच्चे ऐसी गंदी हरकतें कर रहे हैं। बच्चों को देखते ही समझ में आ जाता है कैसी परवरिश दे रहे हैं इनके माँ-बाप। भीड़ जमा देख शर्मा जी भी दौड़े आए तो अपने बेटे को उस अवस्था में देख कर बहुत लज्जित हुए वहाँ खड़े सभी लोगों ने उनकी बहुत बेज्जती की। मोनू ने सबकुछ देख लिया: सुविचार कहानी | हिंदी कहानी | Monu Ne Sabkuch Dekh Liya Hindi Story

शर्मा जी ने तो गुस्से में आकर अपने बेटे पर हाथ ही उठा दिया था लेकिन मैंने उन्हें रोक दिया और मोनु को साथ में लेकर शर्मा जी का हाथ पकड़ कर अपनी गाड़ी में बैठा कर एक पार्क में ले गया।वहाँ मैंने उनका गुस्सा शांत किया। मैंने उनसे पूछा, क्या मोनु किसी बुरी संगत में है जो इसे गंदी बातें सीखा रहा हो। शर्मा जी ने कहा, नहीं ऐसी कोई बात नहीं है। फिर मैंने कहा- हो न हो इस बच्चे के मन में कैसे भी इस तरह कि भवनाएं घर कर गई है, इसे फौरन किसी मनोचिकित्सक के पास लेकर जाना होगा जो इसकी काउंसिलिंग कर पता लगा पाएगा कि इसके मन में ऐसी बातें कहाँ से आईं। फिर मैं उन्हें एक मनोचिकित्सक के पास ले गया। काफी देर की काउंसिलिंग के बाद उसने बताया हम सभी बच्चे बिल्डिंग के नीचे पति-पत्नी का खेल खेल रहे थे। जैसे मेरे मम्मी-पापा खेलते हैं। 

मेरे पापा दूसरे शहर में काम करते हैं और हर शनिवार को आते हैं और रविवार की शाम को चले जाते हैं। जबतक पापा बाहर रहते हैं माँ बहुत ही प्यार से उनसे बातें करती है और जब भी पापा आने वाले रहते हैं मेरी माँ मुझे जल्दी सुला देती है। मैं भी उनसे बहुत सारी बातें करना चाहता हूँ। सुबह पापा देर से जगते हैं और मेरे लिए उनके पास समय नहीं रहता। पापा के आने के पहले माँ के कमरे में एक सीडी रखी थी जिसे देख मैंने सोचा ये मेरे गेम की सीडी है और उसे लैपटाप में डालकर चेक किया तभी माँ अचानक मुझे सुलाने आ गई। मैं भी सोचता था कि पापा के आने से पहले माँ मुझे जल्दी क्यों सुला देती है। फिर मैंने रात को सिर्फ सोने का बहाना किया और पापा के आते ही सब कुछ छुपकर देखा कि माँ उन्हें प्यार से गले लगाती है और उसके बाद वो कैसे खेलते हैं। 

मोनु की यह सब सुनकर मेरे और शर्मा जी के पसीने छुट गए। डॉक्टर ने उसे कुछ दवाइयाँ दी हैं और साथ ही सलाह भी दिया है कि तुरंत ही उसका यह माहौल बदल दे। उसके खेल-खिलौने फौरन बदल दिये जाएँ। उसे माँ-बाप का भरपूर समय मिलना चाहिए। उसके सामने कभी-भी उस बात की चर्चा न हो। उन्हें फौरन ये जगह छोडना होगा ताकि समय के साथ-साथ वह इस वाकये को भूल सके। डॉक्टर ने बताया- हमलोग बच्चों को अपने बीच की बाधा समझते हैं और किसी-न-किसी तरह उसे मोबाइल, लैपटाप और इंटरनेट मुहैया करा कर उसे व्यस्त कर देते हैं ताकि हम अपना काम बिना किसी डिस्टरवेंस के कर सकें।  मोनू ने सबकुछ देख लिया: सुविचार कहानी | हिंदी कहानी | Monu Ne Sabkuch Dekh Liya Hindi Story

आज कल इंटरनेट पर बिना सर्च किए भी कुछ अश्लील तस्वीरें और बातें दिख जाते हैं, जो बच्चों के कोमल मन पर बहुत बुरा असर छोड़ते हैं। और आगे चलकर वो हमारे हाथ से बाहर हो जाते हैं नेहा ये सब सुनकर स्तब्ध रह गई थी। सोहन ने आगे कहा, "जब शर्मा जी ने घर आकर मोनु के गेम की सीडी चेक कि तो उसमें भद्दी वीडियो वाली सीडी भी मिली इसके साथ ही उसके मोबाईल में भी कई गलत साइट्स की हिस्ट्री थी और जानती हो उसने तो बहुत ही अश्लील ड्राइंग भी बनाया हुआ था।"ये सब सुनकर नेहा काँप उठी, उसने झट से कहा, "सुनो जी हम अपनी बेटी को अलग से मोबाईल नहीं देंगे और कभी देंगे भी तो अपनी निगरानी में प्रयोग करने को कहेंगे। हम अपनी बेटी के साथ ढेर सारा समय बिताएंगे और हर सही-गलत बात के लिए उसका उचित मार्गदर्शन भी करेंगे।"


सोहन ने भी सहमति में सिर हिला दिया। दोस्तों अपने बच्चों के साथ प्यार भरा रिश्ता बनाकर उन्हें सही-गलत की शिक्षा देनी चाहिए। और सबसे महत्वपूर्ण बात कि उनके साथ ढेर सारा वक़्त बिताना चाहिए क्योंकि माता-पिता होना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है, और परवरिश कोई खेल की बात नहीं होती है। क्या आप इस बात से सहमत हैं,  कमेंट करके हमें जरूर बताएं। धन्यवाद!

दोस्तों! मोनू ने सबकुछ देख लिया: सुविचार कहानी, हिंदी कहानी को पढ़ने के लिए धन्यवाद!  

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