दो बहुएँ और चालाक बुआ सास

दीपा और अनिता दोनों ही देवरानी और जेठानी थीं। दीपा नौकरी करतीं थीं और अनिता घर संभालतीं थीं। उनका परिवार बहुत बड़ा था, सास ससुर और उन दोनों के बच्चें कुल मिलाकर घर में 10 लोग थें, और आज कई सालों बाद  उनकी बुआ सास अपनें भाई के पास रहनें आई थीं। सुबह उठतें ही बुआ जी नें देखा दीपा जल्दी जल्दी अपनें काम निपटा रहीं थीं, अनिता नें सब का नाश्ता बना दिया, जिस नाश्तें को दीपा नें सबकों परोस दिया, इसके बाद दीपा नें खुद अपना टिफिन पैक किया और जॉब पर चलीं गयी। अनिता नें फिर दोपहर का खाना बनाया और थोड़ी देर बैठ गयी अपनीं सास और बुआ सास के पास। 

बुआ सास से रहा नहीं गया और अनिता से बोली, कि छोटी बहुँ तेरी जिठानी दीपा तुझपर बड़ा हुकुम चलातीं हैं सुबह से देख रहीं हूँ रसोई घर में तू ही लगीं हुई हैं और वो महारानी दिखावा करनें के लिए सबकों नाश्ता परोस रहीं थीं जैसे उसी नें बनाया हों। ये सुनतें ही अनिता नें अपनीं बुआ सास की तरफ देखा और बड़ी प्यार से कहा, नहीं ऐसी कोई बात नहीं हैं बुआ जी, दीपा बहुत ही अच्छी हैं। बुआ बोली, तू बहुत भोली हैं अनिता पर मैं सब समझती हूँ इतनी बूढ़ी मैं ऐसे ही नहीं हुई। अनिता से अब रहा नहीं गया और वो बोली, कि बुआ जी आपकों दीपा दीदी का बाकी सबकों नाश्ता परोसना दिखा मगर आपकों ये नहीं पता कि उन्होंनें मुझें डांट कर सबसे पहले नाश्ता करवाया फिर चाय पिलाई और वो रोज ही मुझें सबसे पहलें ही नाश्ता करवा देती हैं, वरना सबका नाश्ता बनाते तो मैं नाश्ता ही न कर पाऊँ वो मेरा कितना ख्याल रखतीं हैं। दो बहुएँ और चालाक बुआ सास | सुविचार कहानी | हिंदी कहानी | Do Bahuyen Aur Chalaak Saas Hindi Story

दीदी सुबह जल्दी उठकर मंदिर की सफाई करके फूल सजाकर रखतीं हैं और वो मुझें खुद से एक घन्टा लेट उठने को कहतीं हैं क्योकि मुझें उठतें ही नहाकर सीधा रसोई में ही जाना पड़ता हैं। शाम को ऑफिस से आतें वक़्त दीदी बाजार से सब्जियाँ भी लेकर आती हैं क्योंकि हमारें हसबैंड रात को लेट हों जाते हैं और दीपा दीदी नें सासु माँ को बाजार जानें के लिए मना किया हैं क्योकि माँजी अब 60 साल से ऊपर की हो चुकी हैं कहीं बाजार जातें समय उन्हें तकलीफ़ न हो जाए। वैसे भी उन्हें घुटनों की परेशानी है और जब माँजी को घूमनें का मन होता हैं तो दीपा दीदी छुट्टी करके खुद उनको घुमाने लेकर जाती हैं, और हाँ बुआजी ,दीपा दीदी रोज शाम को आकर खाना बनानें में मेरी खूब मदद करती हैं चाहें वों कितनी भी थकी हुई हों। वो मेरी जिठानी जरूर हैं मगर वो मुझें अपनीं छोटी बहन ही मानती हैं और मैं उन्हें बड़ी बहन मानती हूँ। 

ये सब सुनतें ही बुआ चुप हों गयी, शायद उसकी चुगली अनिता के आगें फेल हों चुकीं थीं। शाम को दीपा सब्जी की थैली अनिता को पकड़ाते हुए बोली, कि अनिता सब्जियों के साथ वाले थैले में तुम्हारी फेवरेट लेखक की किताब भी लाई हूँ। ये सुनकर अनिता ख़ुश हों गयी और बोली थेंक्स दीदी। अनिता सब्जी की थैली किचन में रखीं और किताब रखनें अपनें कमरें में चलीं गयी। तभी बुआ जी नें दीपा को आवाज दी, बड़ी बहुँ जरा यहाँ आना। दीपा बोली, जी बुआ जी। तभी बुआ बोली, कि तुम इतनी मेहनत करकें कमाती हों और ऐसे ही फालतू किताबें खरीद कर पैसों की बर्बादी कर रहीं हों, वो भी अपनीं देवरानी के लिए। वो तो वैसे भी घर में करतीं ही क्या हैं तुम दिन भर मेहनत करती हों और वो घर पर आराम करतीं हैं।  दो बहुएँ और चालाक बुआ सास | सुविचार कहानी | हिंदी कहानी | Do Bahuyen Aur Chalaak Saas Hindi Story

इस बात पर दीपा मुस्कुराई और बोली, क्या बुआ जी आराम और अनिता उसे तो कह कह कर आराम करवाना पड़ता हैं, सुबह से बेचारी लगीं हीं रहतीं हैं। किचन में सबकी अलग अलग पसंद, मेरे और उसके मिलाकर चार बच्चों का टिफिन, सब वो ही करतीं हैं फिर भी उसके चेहरें पर हमेशा एक सुंदर सी मुस्कान ही रहतीं हैं। सुबह की चाय पीने का भी समय नहीं रहता उसे और जब दोपहर बच्चें आतें हैं फिर उनका खाना उनकी पढ़ाई सब वही देखतीं हैं। वो हैं इसलिए मुझें बच्चों की चिंता भी नहीं रहतीं और मैं अपना पूरा ध्यान ऑफिस में लगा पाती हूँ, कुछ दिनों पहलें ही प्रमोशन मिला हैं। मम्मी पापा की दवाई कब खत्म हुई और कब लाना हैं ये सब वो ही ध्यान रखतीं हैं। घर पर भी कभी कौनसा रिश्तेदार आता हैं उनकी सेवा भी वहीं करतीं हैं, और बुआ जी, घर पर रहकर घर और बच्चें संभालना कोई छोटी बात नहीं। 

मेहमानों की भी आवभगत अनिता बिना किसी शिकायत के करती हैं। उसे तो बस पढ़ने का ही शोक हैं, फिर क्या मै अपनीं छोटी बहन की छोटी सी इच्छा भी पूरी नहीं करूँगी, अगर उसकी इच्छा मैं पूरी नहीं करूँगी तो कौन करेगा? अब तो बुआ की पूरी तरह से ही बोलती बंद हो चुकीं थीं। फिर दीपा भी अपनें कमरें में चली गयी। ये सारी बातें दीपा की सास पीछे खड़ी हुई सुन रहीं थीं, वो बुआ के पास आकर बोली, कि जीजी ये दोनों देवरानी जिठानी जरूर हैं मगर इनका प्रेम दो सगी बहनों से भी ज्यादा बढ़कर हैं। ये दोनों ही एक दूसरें का अधूरा पन पूरा करतीं हैं, मेरे घर की मजबूत नींव हैं ये दोनों। दो बहुएँ और चालाक बुआ सास | सुविचार कहानी | हिंदी कहानी | Do Bahuyen Aur Chalaak Saas Hindi Story


पहलें मैं भी एक बुरी सास थीं और हमेशा ही मैं इनको लड़ाने की ही सोचतीं थीं, लेकिन इनके प्रेम के आगें मैं भी पिघल गयी और वैसे भी इनको लडवा कर नुकसान तो हमारें ही घर का हैं न, इसलिए मैं भी इनके ही प्रेम में मिल चुकीं हूँ, लेकिन ये बातें दीपा और अनिता की बुआ सास को समझ नहीं आयी और वो मुँह घुमाकर अपनें कमरें में चली गयी। क्योकि वो तो इनको लड़वानें ही आयी थीं, लेकिन दीपा और अनिता जैसी बहुओं के बीच दरार पैदा करना बिल्कुल नामुमकिन था। और दोस्तों अगर दीपा अनिता जैसी बहुँ बेटी हर घर में हों, तो उनके प्यारे घर को बड़ी से बड़ी ताकत भी नर्क नहीं बना सकतीं। वाकई में ऐसी बहुएँ हर घर में हों तो हर एक घर स्वर्ग बन सकता हैं। आप इस कहानी के बारें में क्या कहेंगें दोस्तों।


दोस्तों! दो बहुएँ और चालाक बुआ सास, सुविचार हिंदी कहानी को पढ़ने के लिए धन्यवाद !   

आपको ये कहानी कैसी लगी नीचे कमेंट कर के हमें जरूर बताइयेगा अगर आपको ये कहानी पसंद आयी हो तो अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे और ऐसी ही प्यारी कहानियां सुनने के लिए  हमारे यूट्यूब चैनल से जुड़े


ये हिंदी कहानियां भी पढें -





दो बहुएँ और चालाक बुआ सास | सुविचार कहानी | हिंदी कहानी | Do Bahuyen Aur Chalaak Saas Hindi Story

Post a Comment

ad